नहीं की 4000 रुपये की नौकरी, सपनों को दिए पंख और बना लिया अपना प्रोडक्शन हाउस

नहीं की 4000 रुपये की नौकरी, सपनों को दिए पंख और बना लिया अपना प्रोडक्शन हाउस

डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाने के अलावा प्रांजल का प्रोडक्शन हाउस एड फिल्म, इंटरव्यू, म्यूजिक एल्बम भी बनाता है।


 

आज पटना समेत देशभर के युवाओं के बीच पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी कंपनी में नौकरी करने की बजाए दूसरों के लिए नौकरी पैदा करने का चलन खूब चल पड़ा है। ऐसे ही एक 24 वर्षीय युवा हैं पटना के रूकुनपुरा वेदनगर इलाके में रहने वाले प्रांजल सिंह। प्रंजाल को एमबीए करने के बाद भी पटना में सिर्फ 4000 रुपये की नौकरी मिल रही थी। लखनऊ की अमिटि यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाले प्रांजल के लिए यह झटका जैसा था। उन्हें लग रहा था कि उन्होंने बड़े संस्थान से मेहनत कर पढ़ाई की फिर भी उन्हें सिर्फ 4000 रुपये की नौकरी मिल रही है तब प्रांजल ने तय किया कि वे ये नौकरी नहीं करेंगे और अपने शौक को अपना करियर बनाएंगे और उसमें आगे बढ़ दूसरों के लिए नौकरी पैदा करेंगे।

कॉलेज लाइफ से ही हमेशा हाथ में कैमरा लिये फोटोग्राफी और फिल्म मेकिंग का शौक रखने वाले प्रांजल ने 2010 में अपनी पढ़ाई के दौरान ही अपना फिल्म प्रोडक्शन हाउस तैयार कर लिया। इस प्रोडक्शन हाउस में वे लोगों को बतौर फ्रीलांसर जोड़ते गए और इस तरह उन्होंने अभी तक अपने प्रोडक्शन हाउस के तहत 12 डॉक्यूमेंट्री फिल्में बना लीं जिसे देशभर में काफी लोगों ने सराहा।

 

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प्रांजल के प्रोडक्शन हाउस के साथ जुड़े हैं 300 फ्रीलांसर
नेशनल ज्योग्राफिक और डिस्कवरी जैसे चैनलों के लिए फोटो भेज चुके प्रांजल सिंह बताते हैं कि आज उनके प्रोडक्शन हाउस वन क्लिक प्रोडक्शन के साथ करीब 300 लोग जुड़े हैं। वे सभी के साथ मिलकर पटना, मुबंई, गुडंगांव, कोलकाता, लखनऊ और बैंगलुरू जैसे शहरों में काम करते हैं। डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाने के अलावा उनका प्रोडक्शन हाउस एड फिल्म, वेडिंग फिल्म, इंटरव्यू, म्यूजिक एल्बम भी बनाता है।

प्रांजल आगे बताते हैं कि आज बहुत खुशी होती है जब इतनी बड़ी टीम के साथ मैं काम करता हूं मैंने करीब 30 स्थायी लोगों को भी अपने प्रोडक्शन हाउस के तहत नौकरी दे रखी है। सभी फ्रीलांसर और अपने स्थायी कर्मचारियों को उनका पेमेंट देने के बाद आज मैं खुद के लिए करीब महीने का 30000 रुपये कमा लेता हूं। मेरे लिए फिलहाल पैसे कमाने से ज्यादा मेरे शौक का पूरा होना ज्यादा खुशी की बात है। मुझे शुरू से फोटोग्राफी का शौक रहा है और धीरे-धीरे फोटोग्राफी का यह शौक फिल्म मेकिंग में बदल गया। अच्छा हुआ मैंने वह नौकरी नहीं की, अगर वह नौकरी करता तो आज अपने इस हुनर को दुनिया के सामने नहीं रख पाता।

 

सामाजिक मुद्दों पर बनायी हैं डॉक्यूमेंट्री फिल्म
प्रांजल सिंह ने कुल 12 डाक्यमेंट्री फिल्म बनायी हैं। वह कहते हैं, “मेरी सारी फिल्में सामजिक मुद्दों पर आधारित रही हैं। मैंने सबसे पहले ‘रेज योर वॉयस-एक आवाज’ फिल्म बनायी थी जो कि निर्भया के साथ हुई गैंग रेप पर आधारित थी। इस फिल्म को काफी लोगों ने सराहा था। फिल्म को दूरदर्शन पर भी प्रदर्शित किया गया था। इस फिल्म को बैंगलोर फिल्म फेस्टिवल में भी सराहना मिली थी।”

वह आगे बताते हैं, “इसके अलावा मैंने उम्मीदें, पटना डॉक्यमेंट्री, जय हो, जिंदगी एक लम्हा जैसे फिल्में समाज से जुड़े मुद्दों जैसे राजनीति, गरीबी, बाल मजदूरी, शिक्षा व बुज़ुर्गों पर बनायी है। इसके अलावा मैंने म्यूजिक एल्बम भी बनाया है। मुझे सबसे पहले पहचान मेरे एलब्म ‘इन मेमोरी ऑफ़ लव’ से मिली। इसे लोगों ने काफी पंसद किया। इसके गाने एमटीवी पर खूब चले।

 

बॉलीवुड और एमटीवी से जुड़े रहे प्रांजल
प्रांजल कहते हैं कि मैंने एमटीवी के लिए भी काम किया। म्यूजिक एलब्म भंवरा एमटीवी के साथ मिलकर बनाया था। यह एलब्म लोगों को काफी पंसद आया। इसके अलावा ओ जानिया एल्बम के गाने भी एमटीवी पर खूब चले थे। मैं बॉलीवुड फिल्म इश्कजादे, दावत ए इश्क, तन्नु वेड्स मन्नु से जुड़ा रहा हूं। इन फिल्मों के लिए मुझे रोज़ाना के आधार पर बतौर फोटोग्राफर काम मिला था। काम के बाद मुझे 5000 रुपये भी मिले थे।

 

वह कहते हैं, “मेरी फिल्म रेज योर वॉयस के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से भी सरहाना मिली थी। मैं जल्द ही लखनऊ में डिपंल यादव के एक कार्यक्रम को शूट करने जाने वाला हूं। मेरी हालिया फिल्म जिंदगी एक लम्हा को काफी सरहाना मिली। ऐसे मुद्दों पर फिल्म बनाने का मेरा मकसद है कि लोग और सरकार इन मुद्दों को लेकर जागरूक हों और लोगों के विकास के लिए सकारात्मक पहल करें।”

 

समाज सेवा को भी देते हैं प्राथमिकता
ऐसा नहीं है कि प्रांजल सिर्फ फिल्मों में ही सामाजिक मुद्दों को उठाते हैं। वे अपने निजी जिंदगी में लोगों की सेवा करते नज़र आते हैं। उन्होंने लखनऊ की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया, ” मैं एक बार रात में दोस्तों के साथ आइसक्रिम खाने निकला था। मुझे वहां कुछ लोग सड़क पर काफी दयनीय स्थिति में बैठै दिखाई दिए। मैं वहां से 5 लोगों को अपने घर ले आया। काफी दिनों तक यह बात पटना में मेरे घर वालों को भी पता नहीं थी। बाद में उन्हें किसी तरह रोज़गार दिलाया और आज वे अपने पैरों पर खड़े होकर कमा रहे हैं।”

 

प्रांजल की इच्छा है कि जल्द ही उनकी कोई फिल्म 70 एमएम के पर्दे पर दिखाए दें। उन्हें पॉलिटिक्स में भी रुचि है अगर उन्हें मौका मिला तो राजनीति में भी जा सकते हैं हालांकि उनका कैमरों के साथ खेलने का शौक हमेशा जारी रहेगा।

 

देखें प्रांजल द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों की झलक                        Click Here

1 Comment
  1. Shonda Gantt 4 days ago

    I’m Louie (18) from Hofsos, Iceland.
    I’m learning Japanese literature at a local college and
    I’m just about to graduate.
    I have a part time job in a backery.

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